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  • Who is PUNDIT as per Sanatan

    TEACHER is a generic word we have imported from the British. In this short thread, let me explain u the word TEACHER

    U will realize how rich Sanatan Dharma & its mother language Sanskrit is & why we have a rotten education system

    Sanskrit words for "teacher" is based on their unique abilities & these are 6 phases or called it an evolution of a Teacher

    1. The teacher who gives you Information is called ADHYAPAK

    2. The one who imparts knowledge along with Information is called  UPADHYAYA

    3. The one who Imparts skill is called ACHARYA

    4. The one who is able to give deep insight into a subject is called PANDIT

    5. The one who has a visionary view on a subject and teaches you to think in that manner is called  DHRISHTA

    6. The one who is able to awaken the wisdom in you, leading you from darkness to light is called GURU

    These are 6 Unique abilities of a TEACHER, the word we use in general term

    If u read Gita, the life journey is from Karm Yog to Gyan Yog

    Which means that teaching journey of a Teacher is from ADHYAPAK to GURU and a student Journey is to learn under ADHYAPAK to GURU

    This is wholistic Sanatan Education which we lost in race to Degree

    Jai Shri Krishan
    Who is PUNDIT as per Sanatan TEACHER is a generic word we have imported from the British. In this short thread, let me explain u the word TEACHER U will realize how rich Sanatan Dharma & its mother language Sanskrit is & why we have a rotten education system Sanskrit words for "teacher" is based on their unique abilities & these are 6 phases or called it an evolution of a Teacher 1. The teacher who gives you Information is called ADHYAPAK 2. The one who imparts knowledge along with Information is called  UPADHYAYA 3. The one who Imparts skill is called ACHARYA 4. The one who is able to give deep insight into a subject is called PANDIT 5. The one who has a visionary view on a subject and teaches you to think in that manner is called  DHRISHTA 6. The one who is able to awaken the wisdom in you, leading you from darkness to light is called GURU These are 6 Unique abilities of a TEACHER, the word we use in general term If u read Gita, the life journey is from Karm Yog to Gyan Yog Which means that teaching journey of a Teacher is from ADHYAPAK to GURU and a student Journey is to learn under ADHYAPAK to GURU This is wholistic Sanatan Education which we lost in race to Degree Jai Shri Krishan
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  • X, फेसबुक और व्हाट्सएप अपने प्रचंण्ड क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है...
    .
    .
    हर नौसिखिया क्रांति करना चाहता है...
    कोई बेडरूम में लेटे-लेटे गौहत्या करने वालों को सबक सिखाने की बातें कर रहा है तो...
    .
    .
    किसी के इरादे सोफे पर बैठे-बैठे मँहगाई, बेरोजगारी या बांग्लादेशियों को उखाड़ फेंकने के हो रहे हैं...
    .
    हफ्ते में एक दिन नहाने वाले लोग स्वच्छता अभियान की खिलाफत और समर्थन कर रहे हैं।
    .
    .
    अपने बिस्तर से उठकर एक गिलास पानी लेने पर नोबेल पुरस्कार की उम्मीद रखने वाले बता रहे हैं कि माँ-बाप की सेवा कैसे करनी चाहिए।
    .
    .
    जिन्होंने आजतक बचपन में कंचे तक नहीं जीते वे बता रहे हैं कि भारत रत्न किसे मिलना चाहिए!
    .
    .
    जिन्हें "गली-क्रिकेट" में इसी शर्त पर खिलाया जाता था कि बॉल कोई भी मारे पर अगर नाली में गई तो निकालना तुझे ही पड़ेगा वो आज कोहली को समझाते पाए जाएँगे कि उसे कैसे खेलना है।
    .
    .
    कई मर्द ऐसे हैं जिन्होंने देश में महिलाओं की कम जनसंख्या को देखते हुए अपनी नकली ID बनाकर जनसंख्या को बराबर कर दिया है।
    .
    .
    जिन्हें यह तक नहीं पता कि हुमायूं, बाबर का कौन था? वह आज बता रहे हैं कि किसने कितनों को काटा था ।
    .
    .
    कुछ दिन भर शायरियाँ पेलेंगे जैसे 'गालिब' के असली उस्ताद तो यहीं बैठे हैं !
    .
    .
    जो नौजवान एक बालतोड़ हो जाने पर रो-रो कर पूरे मोहल्ले में हल्ला मचा देते हैं वे देश के लिए सर कटा लेने की बात करते दिखेंगे!
    .
    .
    किसी भी पार्टी का समर्थक होने में समस्या यह है कि...
    "भाजपा" समर्थक को अंधभक्त...
    "आप" समर्थक उल्लू...
    तथा "कांग्रेस"समर्थक बेरोजगार... करार दे दिये जाते हैं!
    .
    .
    कॉपी-पेस्ट करनेवालों के तो कहने ही क्या !
    किसी की भी पोस्ट चेंप कर ऐसे व्यवहार करेंगे जैसे साहित्य की गंगा उनके घर से ही बहती है...और वो भी 'अवश्य पढ़े' तथा 'मार्केट में नया है' की सूचना के साथ।
    .
    .
    एक कप दूध पी लें तो दस्त लग जाएँ, ऐसे लोग हेल्थ की tips दिए जा रहे हैं।
    .
    .
    लेकिन समाज के असली जिम्मेदार नागरिक हैं: "टैगिए"...
    इन्हें ऐसा लगता है कि जब तक ये गुड मॉर्निंग वाले पोस्ट पर टैग नहीं करेंगे तब तक लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि सुबह हो चुकी है !
    .
    .
    जिनकी वजह से शादियों में गुलाबजामुन वाले स्टॉल पर एक extra आदमी खड़ा रखना जरूरी है वो आम बजट पर टिप्पणी करते हुए पाए जाते हैं...!
    .
    .
    कॉकरोच देखकर चिल्लाते हुये पूरे मोहल्ले में भागने वाले पाकिस्तान को धमका रहे होते हैं कि "अब भी वक्त है सुधर जाओ"!
    .
    .
    क्या वक्त आ गया है वाकई ।
    धन्य हैं व्हाट्सएप, फेसबुक और X युग के क्रांतिकारी...!!!
    Dr GP
    X, फेसबुक और व्हाट्सएप अपने प्रचंण्ड क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है... . . हर नौसिखिया क्रांति करना चाहता है... कोई बेडरूम में लेटे-लेटे गौहत्या करने वालों को सबक सिखाने की बातें कर रहा है तो... . . किसी के इरादे सोफे पर बैठे-बैठे मँहगाई, बेरोजगारी या बांग्लादेशियों को उखाड़ फेंकने के हो रहे हैं... . हफ्ते में एक दिन नहाने वाले लोग स्वच्छता अभियान की खिलाफत और समर्थन कर रहे हैं। . . अपने बिस्तर से उठकर एक गिलास पानी लेने पर नोबेल पुरस्कार की उम्मीद रखने वाले बता रहे हैं कि माँ-बाप की सेवा कैसे करनी चाहिए। . . जिन्होंने आजतक बचपन में कंचे तक नहीं जीते वे बता रहे हैं कि भारत रत्न किसे मिलना चाहिए! . . जिन्हें "गली-क्रिकेट" में इसी शर्त पर खिलाया जाता था कि बॉल कोई भी मारे पर अगर नाली में गई तो निकालना तुझे ही पड़ेगा वो आज कोहली को समझाते पाए जाएँगे कि उसे कैसे खेलना है। . . कई मर्द ऐसे हैं जिन्होंने देश में महिलाओं की कम जनसंख्या को देखते हुए अपनी नकली ID बनाकर जनसंख्या को बराबर कर दिया है। . . जिन्हें यह तक नहीं पता कि हुमायूं, बाबर का कौन था? वह आज बता रहे हैं कि किसने कितनों को काटा था । . . कुछ दिन भर शायरियाँ पेलेंगे जैसे 'गालिब' के असली उस्ताद तो यहीं बैठे हैं ! . . जो नौजवान एक बालतोड़ हो जाने पर रो-रो कर पूरे मोहल्ले में हल्ला मचा देते हैं वे देश के लिए सर कटा लेने की बात करते दिखेंगे! . . किसी भी पार्टी का समर्थक होने में समस्या यह है कि... "भाजपा" समर्थक को अंधभक्त... "आप" समर्थक उल्लू... तथा "कांग्रेस"समर्थक बेरोजगार... करार दे दिये जाते हैं! . . कॉपी-पेस्ट करनेवालों के तो कहने ही क्या ! किसी की भी पोस्ट चेंप कर ऐसे व्यवहार करेंगे जैसे साहित्य की गंगा उनके घर से ही बहती है...और वो भी 'अवश्य पढ़े' तथा 'मार्केट में नया है' की सूचना के साथ। . . एक कप दूध पी लें तो दस्त लग जाएँ, ऐसे लोग हेल्थ की tips दिए जा रहे हैं। . . लेकिन समाज के असली जिम्मेदार नागरिक हैं: "टैगिए"... इन्हें ऐसा लगता है कि जब तक ये गुड मॉर्निंग वाले पोस्ट पर टैग नहीं करेंगे तब तक लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि सुबह हो चुकी है ! . . जिनकी वजह से शादियों में गुलाबजामुन वाले स्टॉल पर एक extra आदमी खड़ा रखना जरूरी है वो आम बजट पर टिप्पणी करते हुए पाए जाते हैं...! . . कॉकरोच देखकर चिल्लाते हुये पूरे मोहल्ले में भागने वाले पाकिस्तान को धमका रहे होते हैं कि "अब भी वक्त है सुधर जाओ"! . . क्या वक्त आ गया है वाकई । धन्य हैं व्हाट्सएप, फेसबुक और X युग के क्रांतिकारी...!!! Dr GP
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  • "1955 में जब धीरूभाई अंबानी से मेरी शादी हुई थी तब मैंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि मेरा जीवन इतना बदल जाएगा। शादी के बाद ही मैंने पहली बार मुंबई देखा था। जब मैं यमन के अदन शहर जा रही थी तब पहली बार मैं स्टीमर में बैठी थी। और मेरे लिए वो बहुत हैरान करने वाला तजुर्बा था। अदन में ज़िंदगी जामनगर के मुकाबले बहुत अलग थी। अदन मेरे लिए टर्निंग पॉइन्ट साबित हुआ था। मुकेश का जन्म वहीं हुआ था। अनिल, दीप्ति और नीना का जन्म मुंबई में हुआ था। अब तो सबकी शादी हो चुकी है। आज बहुओं, दामादों और बच्चों को मिलाकर हमारा 19 लोगों का परिवार हो गया है।"

    24 फरवरी 1934 को कोकिलाबेन का जन्म जामनगर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था, जो उस वक्त नवानगर कहलाता था। एक आम भारतीय लड़की की तरह ही कोकिलाबेन की परवरिश हुई थी। उनकी माता ने उन्हें घर के सभी काम करने सिखाए थे। साथ ही सिलाई व कढ़ाई भी उन्होंने सीखी थी। उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की थी। साल 1955 में कोकिलाबेन और धीरूभाई अंबानी की शादी हुई थी। शादी के बाद वो अपनी ससुराल चोरवाड आ गई। उस ज़माने में धीरूभाई के घर एक बैलगाड़ी हुआ करती थी। शादी के कुछ महीनों बाद धीरूभाई काम करने अदन चले गए।

    एक दफा अदन से धीरूभाई ने कोकिलाबेन को एक चिट्ठी लिखी। उस चिट्ठी में धीरूभाई ने लिखा,"कोकिला, मैंने यहां एक कार खरीद ली है। जब तुम अदन आओगी तो मैं तुम्हें इसी कार से लेने आऊंगा। जानती हो कार का रंग क्या है? काली। बिल्कुल मेरी तरह।" धीरूभाई की वो चिट्ठी पढ़कर उस दिन कोकिलाबेन बहुत हंसी थी। और जब कुछ दिन बाद वो अदन पहुंची तो पोर्ट पर उन्हें रिसीव करने धीरूभाई अपनी उसी काली कार में आए थे। कोकिला जी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि चोरवाड में हमारे पास बैलगाड़ी थी। अदन में हमारे पास कार आई। और मुंबई में तो हवाई जहाज और हैलीकॉप्टर भी आ गया।

    1958 में धीरूभाई अंबानी और कोकिलाबेन अदन से वापस भारत लौट आए। धीरूभाई ने मुंबई को अपना ठिकाना बनाया। हर गुज़रते दिन के साथ वो तरक्की करते चले गए। उन्होंने रिलायंस की स्थापना की। कदम दर कदम वो कामयाबी की ऊंचाईयां छूते चले गए। और अपनी पत्नी कोकिलाबेन को उन्होंने हमेशा अपने साथ रखा। हर फैसला वो कोकिलाबेन से सलाह-मशविरा करके लेते थे। हर नए प्लांट का इनोग्रेशन कोकिला जी से कराते थे। धीरूभाई हर प्रोग्राम व पार्टी में कोकिलाबेन को साथ लेकर जाते थे। कभी कोकिलाबेन मना करती थी तो साथ चलने की गुज़ारिश करते थे।

    चूंकि कोकिलाबेन 10वीं तक पढ़ी थी, वो भी गुजराती माध्यम से, इसलिए धीरूभाई चाहते थे कि वो और पढ़ें। धीरूभाई ने अपने बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए एक ट्यूटर रखा था। एक दिन धीरूभाई ने कोकिलाबेन से कहा कि तुम्हें भी अंग्रेजी सीखनी चाहिए। तुम भी इसी ट्यूटर से क्यों नहीं सीख लेती इंग्लिश? तभी से कोकिलाबेन ने भी अंग्रेजी पर मेहनत शुरू क दी। और कुछ सालों में उनकी भी अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ हो गई।

    एक इंटरव्यू में कोकिलाबेन ने बताया था,"धीरूभाई उन्हें अपने साथ फाइवस्टार होटल्स में ले जाते थे। और वहां पर तरह-तरह का खाना खिलाते थे जैसे इटैलियन, मैक्सिकन, चायनीज़, जैपनीज़ व अन्य। इसलिए ताकि जब मैं उनके साथ किसी पार्टी या विदेश में जाऊं तो मुझे खाने के लिए परेशान ना होना पड़े। वो जब भी मुझे विदेश घुमाने ले जाते थे तो मुझे हर जगह के बारे में अच्छे से जानकारी देते थे। दुनिया के बारे में उनकी नॉलेज बहुत अच्छी थी।"

    Bottomline, you don't progress by living in a well like what's happening in KA, you have to explore new things and learn new things. Language is just a bridge to communicate your mind to others. Never force ur language on others who don't know
    "1955 में जब धीरूभाई अंबानी से मेरी शादी हुई थी तब मैंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि मेरा जीवन इतना बदल जाएगा। शादी के बाद ही मैंने पहली बार मुंबई देखा था। जब मैं यमन के अदन शहर जा रही थी तब पहली बार मैं स्टीमर में बैठी थी। और मेरे लिए वो बहुत हैरान करने वाला तजुर्बा था। अदन में ज़िंदगी जामनगर के मुकाबले बहुत अलग थी। अदन मेरे लिए टर्निंग पॉइन्ट साबित हुआ था। मुकेश का जन्म वहीं हुआ था। अनिल, दीप्ति और नीना का जन्म मुंबई में हुआ था। अब तो सबकी शादी हो चुकी है। आज बहुओं, दामादों और बच्चों को मिलाकर हमारा 19 लोगों का परिवार हो गया है।" 24 फरवरी 1934 को कोकिलाबेन का जन्म जामनगर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था, जो उस वक्त नवानगर कहलाता था। एक आम भारतीय लड़की की तरह ही कोकिलाबेन की परवरिश हुई थी। उनकी माता ने उन्हें घर के सभी काम करने सिखाए थे। साथ ही सिलाई व कढ़ाई भी उन्होंने सीखी थी। उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की थी। साल 1955 में कोकिलाबेन और धीरूभाई अंबानी की शादी हुई थी। शादी के बाद वो अपनी ससुराल चोरवाड आ गई। उस ज़माने में धीरूभाई के घर एक बैलगाड़ी हुआ करती थी। शादी के कुछ महीनों बाद धीरूभाई काम करने अदन चले गए। एक दफा अदन से धीरूभाई ने कोकिलाबेन को एक चिट्ठी लिखी। उस चिट्ठी में धीरूभाई ने लिखा,"कोकिला, मैंने यहां एक कार खरीद ली है। जब तुम अदन आओगी तो मैं तुम्हें इसी कार से लेने आऊंगा। जानती हो कार का रंग क्या है? काली। बिल्कुल मेरी तरह।" धीरूभाई की वो चिट्ठी पढ़कर उस दिन कोकिलाबेन बहुत हंसी थी। और जब कुछ दिन बाद वो अदन पहुंची तो पोर्ट पर उन्हें रिसीव करने धीरूभाई अपनी उसी काली कार में आए थे। कोकिला जी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि चोरवाड में हमारे पास बैलगाड़ी थी। अदन में हमारे पास कार आई। और मुंबई में तो हवाई जहाज और हैलीकॉप्टर भी आ गया। 1958 में धीरूभाई अंबानी और कोकिलाबेन अदन से वापस भारत लौट आए। धीरूभाई ने मुंबई को अपना ठिकाना बनाया। हर गुज़रते दिन के साथ वो तरक्की करते चले गए। उन्होंने रिलायंस की स्थापना की। कदम दर कदम वो कामयाबी की ऊंचाईयां छूते चले गए। और अपनी पत्नी कोकिलाबेन को उन्होंने हमेशा अपने साथ रखा। हर फैसला वो कोकिलाबेन से सलाह-मशविरा करके लेते थे। हर नए प्लांट का इनोग्रेशन कोकिला जी से कराते थे। धीरूभाई हर प्रोग्राम व पार्टी में कोकिलाबेन को साथ लेकर जाते थे। कभी कोकिलाबेन मना करती थी तो साथ चलने की गुज़ारिश करते थे। चूंकि कोकिलाबेन 10वीं तक पढ़ी थी, वो भी गुजराती माध्यम से, इसलिए धीरूभाई चाहते थे कि वो और पढ़ें। धीरूभाई ने अपने बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए एक ट्यूटर रखा था। एक दिन धीरूभाई ने कोकिलाबेन से कहा कि तुम्हें भी अंग्रेजी सीखनी चाहिए। तुम भी इसी ट्यूटर से क्यों नहीं सीख लेती इंग्लिश? तभी से कोकिलाबेन ने भी अंग्रेजी पर मेहनत शुरू क दी। और कुछ सालों में उनकी भी अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ हो गई। एक इंटरव्यू में कोकिलाबेन ने बताया था,"धीरूभाई उन्हें अपने साथ फाइवस्टार होटल्स में ले जाते थे। और वहां पर तरह-तरह का खाना खिलाते थे जैसे इटैलियन, मैक्सिकन, चायनीज़, जैपनीज़ व अन्य। इसलिए ताकि जब मैं उनके साथ किसी पार्टी या विदेश में जाऊं तो मुझे खाने के लिए परेशान ना होना पड़े। वो जब भी मुझे विदेश घुमाने ले जाते थे तो मुझे हर जगह के बारे में अच्छे से जानकारी देते थे। दुनिया के बारे में उनकी नॉलेज बहुत अच्छी थी।" Bottomline, you don't progress by living in a well like what's happening in KA, you have to explore new things and learn new things. Language is just a bridge to communicate your mind to others. Never force ur language on others who don't know
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  • Poem : Titan vs Rolex

    In a world of ticks and tocks, two watches stood tall,
    Titan and Rolex, answering every call.
    Titan boasted strength, sturdy and bold,
    While Rolex shimmered with elegance, worth more than gold.

    Titan chuckled, "I'm rugged, built to endure,
    Through every adventure, I'll remain secure."
    Rolex smirked, "But I grace wrists with grace,
    In boardrooms or galas, I set the pace."

    Titan retorted, "You may shine bright and fine,
    But when the going gets tough, you won't outshine."
    Rolex replied, "Yet in precision, I excel,
    Timing every moment, my story to tell."

    But in the end, as they bantered and boast,
    They realized their worth wasn't a contest to host.
    For Titan and Rolex, each had its own flair,
    In their own worlds, both beyond compare.

    So let them tick on, in their timeless quest,
    For Titan and Rolex, both proved the best.
    In a symphony of seconds, their differences unfurled,
    Two watches, two worlds, both ruling their own world.

    ROLEX VS TITAN

    Titan asked Rolex: "Both of us show time but then why you are 100 times more expensive than me?"

    ROLEX replied : " You show time TO THE PERSON and I show time OF THE PERSON."
    Poem : Titan vs Rolex In a world of ticks and tocks, two watches stood tall, Titan and Rolex, answering every call. Titan boasted strength, sturdy and bold, While Rolex shimmered with elegance, worth more than gold. Titan chuckled, "I'm rugged, built to endure, Through every adventure, I'll remain secure." Rolex smirked, "But I grace wrists with grace, In boardrooms or galas, I set the pace." Titan retorted, "You may shine bright and fine, But when the going gets tough, you won't outshine." Rolex replied, "Yet in precision, I excel, Timing every moment, my story to tell." But in the end, as they bantered and boast, They realized their worth wasn't a contest to host. For Titan and Rolex, each had its own flair, In their own worlds, both beyond compare. So let them tick on, in their timeless quest, For Titan and Rolex, both proved the best. In a symphony of seconds, their differences unfurled, Two watches, two worlds, both ruling their own world. ROLEX VS TITAN Titan asked Rolex: "Both of us show time but then why you are 100 times more expensive than me?" ROLEX replied : " You show time TO THE PERSON and I show time OF THE PERSON."
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  • Need vs. Greed

    "Whether U have a Maruti or a BMW, the road remains the same.

    Whether U have a Titan or a Rolex, the time is the same.

    There's nothing wrong in dreaming a luxurious life.

    What needs to be taken care of is not let Need become Greed because Needs can always be met, but Greed can never be fulfilled."
    Need vs. Greed "Whether U have a Maruti or a BMW, the road remains the same. Whether U have a Titan or a Rolex, the time is the same. There's nothing wrong in dreaming a luxurious life. What needs to be taken care of is not let Need become Greed because Needs can always be met, but Greed can never be fulfilled."
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  • The creator of the universe has designed life in such a way that even with all-around success, he leaves the picture of life somewhere consciously incomplete.

    The presence of this imperfection is a constant reminder to stay grounded.
    The world's most expensive wedding ceremony of Anant Ambani, the son of Mukesh Ambani, chairman of Reliance Group, the eleventh richest man in the world and the number one richest businessman in Asia, made headlines around the world at the beginning of March. Discussions also took place on social media around the world.

    12,000 items were served to the guests for breakfast, lunch, afternoon tea, dinner, and midnight snack during the event. All the superstars of the film industry were seen dancing in this event. Despite the presence of famous glamorous personalities from all over the world, all eyes were on Anant Ambani who was physically gigantic. Because he is suffering from a serious illness. That is a disease that cannot be treated with traditional medicine. He has to be given constant steroids for treatment. These corticosteroids cause uncontrollable appetite, which causes the person to consume large amounts of food. As a result, he gains uncontrollable weight.

    Despite having a wealth of billions of dollars, Mukesh Ambani's beloved and youngest son is suffering from a disease for which there is no other remedy in this universe except the side effects of steroids.

    When Anant is afflicted with an elephant-like illness, Mukesh Ambani transforms thousands of acres of land into a safari park filled with elephant treatment, entertainment, spa, and massage facilities. Hundreds of tons of dry fruits are fed to the elephants every day in this safari park.

    This is just a glimpse of Mukesh Ambani's personal struggle with his sick son.

    He cannot buy a day of perfect health for his son, even though all the comforts lie at his feet.

    Addressing thousands of guests at the function, Mukesh Ambani said that his life is not a bed of roses but a journey full of thorns.

    As Mukesh Ambani spoke these words, the camera zoomed in on the face of Asia's richest man, his face was seen in deep sorrow, with tears welling up in his eyes. The pain and helplessness in those tears was palpable. He felt sad that despite his wealth of billions of dollars, he could not buy a single day of perfect health for his son.

    How strange is the justice of the creator? He keeps the picture of life incomplete somewhere. And it shows that in this imperfection lies the essence of perfection…!

    Implication - Instead of envying Mukesh Ambani's wealth, we should thank the Creator for the incomplete picture of our lives. Because our picture is not as surgical as Ambani's incomplete picture.

    So let us be happy and express thanks and gratitude to God.

    But we here have problems with his expenses on wedding which he incurred from his tax paid money from personal pocket
    Dr GP
    The creator of the universe has designed life in such a way that even with all-around success, he leaves the picture of life somewhere consciously incomplete. The presence of this imperfection is a constant reminder to stay grounded. The world's most expensive wedding ceremony of Anant Ambani, the son of Mukesh Ambani, chairman of Reliance Group, the eleventh richest man in the world and the number one richest businessman in Asia, made headlines around the world at the beginning of March. Discussions also took place on social media around the world. 12,000 items were served to the guests for breakfast, lunch, afternoon tea, dinner, and midnight snack during the event. All the superstars of the film industry were seen dancing in this event. Despite the presence of famous glamorous personalities from all over the world, all eyes were on Anant Ambani who was physically gigantic. Because he is suffering from a serious illness. That is a disease that cannot be treated with traditional medicine. He has to be given constant steroids for treatment. These corticosteroids cause uncontrollable appetite, which causes the person to consume large amounts of food. As a result, he gains uncontrollable weight. Despite having a wealth of billions of dollars, Mukesh Ambani's beloved and youngest son is suffering from a disease for which there is no other remedy in this universe except the side effects of steroids. When Anant is afflicted with an elephant-like illness, Mukesh Ambani transforms thousands of acres of land into a safari park filled with elephant treatment, entertainment, spa, and massage facilities. Hundreds of tons of dry fruits are fed to the elephants every day in this safari park. This is just a glimpse of Mukesh Ambani's personal struggle with his sick son. He cannot buy a day of perfect health for his son, even though all the comforts lie at his feet. Addressing thousands of guests at the function, Mukesh Ambani said that his life is not a bed of roses but a journey full of thorns. As Mukesh Ambani spoke these words, the camera zoomed in on the face of Asia's richest man, his face was seen in deep sorrow, with tears welling up in his eyes. The pain and helplessness in those tears was palpable. He felt sad that despite his wealth of billions of dollars, he could not buy a single day of perfect health for his son. How strange is the justice of the creator? He keeps the picture of life incomplete somewhere. And it shows that in this imperfection lies the essence of perfection…! Implication - Instead of envying Mukesh Ambani's wealth, we should thank the Creator for the incomplete picture of our lives. Because our picture is not as surgical as Ambani's incomplete picture. So let us be happy and express thanks and gratitude to God. But we here have problems with his expenses on wedding which he incurred from his tax paid money from personal pocket Dr GP
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  • कितना मुश्किल है वहां रहना जहां "तुम" भी हो,
    "मैं" भी हूं......पर "हम" न हों!!

    दो लाइन में जीवन का सत्य
    कितना मुश्किल है वहां रहना जहां "तुम" भी हो, "मैं" भी हूं......पर "हम" न हों!! दो लाइन में जीवन का सत्य
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  • Come On England
    Come On England
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  • Two boys getting ready to cheer English team in tonight's semi
    Two boys getting ready to cheer English team in tonight's semi
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  • Host Germany can now focus on great hospitality!!
    Cruel goal at the last minute
    Host Germany can now focus on great hospitality!! Cruel goal at the last minute
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  • If there is any conflict between the terms in this policy and such mechanism, the terms of the transfer mechanism shall govern. We transfer personal data to countries other than the country in which it was collected.
    Official Website:- https://www.thecryptodays.com/immediate-zenx-reviews/
    If there is any conflict between the terms in this policy and such mechanism, the terms of the transfer mechanism shall govern. We transfer personal data to countries other than the country in which it was collected. Official Website:- https://www.thecryptodays.com/immediate-zenx-reviews/
    WWW.THECRYPTODAYS.COM
    Immediate Zenx {Reviews 2024} – Legit Crypto Trading Platform or Scam?
    Immediate Zenx emerges as a sophisticated trading platform backed by artificial intelligence and advanced algorithms aimed at streamlining the cryptocurrency
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  • To ensure your 22ct wedding gold bracelet remains in pristine condition, follow these care tips:

    Regular Cleaning: Clean your bracelet with a soft cloth and mild soapy water. Avoid using harsh chemicals that can damage the gold and gemstones.

    Proper Storage: Store your bracelet in a soft pouch or a lined jewelry box to prevent scratches and minimize exposure to air and moisture.

    Professional Maintenance: Periodically have your bracelet inspected and polished by a professional jeweler to maintain its luster and structural integrity.

    Conclusion
    A 22ct wedding gold bracelet is more than just an accessory; it is a symbol of love, tradition, and enduring value. Its timeless elegance, cultural significance, and high quality make it a cherished possession for brides and grooms. Whether you are looking to celebrate a special occasion, invest in a valuable asset, or simply add a touch of luxury to your wedding attire, a 22ct wedding gold bracelet is a perfect choice. Its unmatched beauty and rich heritage make it a symbol of luxury and tradition that will be treasured for generations.

    https://www.a1jewellers.com/gold-jewellery/-/bracelets
    To ensure your 22ct wedding gold bracelet remains in pristine condition, follow these care tips: Regular Cleaning: Clean your bracelet with a soft cloth and mild soapy water. Avoid using harsh chemicals that can damage the gold and gemstones. Proper Storage: Store your bracelet in a soft pouch or a lined jewelry box to prevent scratches and minimize exposure to air and moisture. Professional Maintenance: Periodically have your bracelet inspected and polished by a professional jeweler to maintain its luster and structural integrity. Conclusion A 22ct wedding gold bracelet is more than just an accessory; it is a symbol of love, tradition, and enduring value. Its timeless elegance, cultural significance, and high quality make it a cherished possession for brides and grooms. Whether you are looking to celebrate a special occasion, invest in a valuable asset, or simply add a touch of luxury to your wedding attire, a 22ct wedding gold bracelet is a perfect choice. Its unmatched beauty and rich heritage make it a symbol of luxury and tradition that will be treasured for generations. https://www.a1jewellers.com/gold-jewellery/-/bracelets
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  • Congratulations to Manoj Ji and Buhari for your New arrival -Aditya
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  • Whether you're new to self-directed investing or an experienced trader, we welcome you. A better option—especially considering Robinhood’s current problems—might be a quick sale to a full-service firm such as Goldman Sachs, UBS or Merrill Lynch. Such a sale would surely provide billion-dollar windfalls for its young founders, Tenev and Bhatt.
    Official Website:-
    https://www.thecryptodays.com/btc-ai-evex-reviews/
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  • Muhammed Yusuf Khan once said: "At the peak of my career, I was traveling on an airplane.

    A simple, unassuming gentleman in a plain shirt and pants sat next to me. He looked like someone from the middle class and well-educated.

    Other passengers recognized me and were chatting with me, but this gentleman seemed unaware of my presence. He was quietly reading to himself, occasionally glancing out of the window. When tea was served, he sipped it in silence.

    I smiled at him, trying to start a conversation. He looked at me, smiled politely, and said, 'Hello.'

    We started talking, and I brought up movies and films, asking, 'Do you watch movies?'

    The gentleman replied, 'Oh, very rarely. I watched one many years ago.'

    I mentioned that I worked in the film industry.

    He responded, 'Oh, that's nice. What do you do?'

    I said, 'I'm an actor.'

    He nodded, 'Oh, that's wonderful!' and went back to reading.

    When we disembarked, I shook his hand and said, 'It was nice traveling with you. By the way, my name is Muhammed Yusuf Khan!'

    The gentleman shook my hand with a smile and said, 'Thank you... it was nice meeting you. I'm JRD Tata (the chairman of Tata)!'

    That day I learned that no matter how big you think you are, there's always someone bigger.

    Be humble; it costs nothing.

    So, my friend, remember to stay humble in your career journey. It doesn't cost anything, and you never know who you might meet along the way!"

    Today is Monday, the best day of the week when you have the opportunity to start writing a new chapter for this week.

    Make it the most productive week as if there is no tomorrow.

    Have a blessed day.
    Muhammed Yusuf Khan once said: "At the peak of my career, I was traveling on an airplane. A simple, unassuming gentleman in a plain shirt and pants sat next to me. He looked like someone from the middle class and well-educated. Other passengers recognized me and were chatting with me, but this gentleman seemed unaware of my presence. He was quietly reading to himself, occasionally glancing out of the window. When tea was served, he sipped it in silence. I smiled at him, trying to start a conversation. He looked at me, smiled politely, and said, 'Hello.' We started talking, and I brought up movies and films, asking, 'Do you watch movies?' The gentleman replied, 'Oh, very rarely. I watched one many years ago.' I mentioned that I worked in the film industry. He responded, 'Oh, that's nice. What do you do?' I said, 'I'm an actor.' He nodded, 'Oh, that's wonderful!' and went back to reading. When we disembarked, I shook his hand and said, 'It was nice traveling with you. By the way, my name is Muhammed Yusuf Khan!' The gentleman shook my hand with a smile and said, 'Thank you... it was nice meeting you. I'm JRD Tata (the chairman of Tata)!' That day I learned that no matter how big you think you are, there's always someone bigger. Be humble; it costs nothing. So, my friend, remember to stay humble in your career journey. It doesn't cost anything, and you never know who you might meet along the way!" Today is Monday, the best day of the week when you have the opportunity to start writing a new chapter for this week. Make it the most productive week as if there is no tomorrow. Have a blessed day.
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  • Very informative Video
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